Sunday, 25 June 2017

देश में 130.74 लाख हेक्येटर क्षेत्र में खरीफ फसल बुआई


     देश में खरीफ फसलों का कुल बुवाई रकबा 130.74 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह रकबा 119.28 लाख हेक्टेयर था। 
          यह जानकारी दी गई है कि 16.70 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई-रोपाई हुई है, जबकि 5.97 लाख हेक्टेयर में दलहन, 17.71 लाख हेक्टेयर मोटे अनाज, 47.52 लाख हेक्टेयर में गन्ना और 24.70 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है।

Wednesday, 14 June 2017

कृषि सहयोग पर आधारित भारत और फिलिस्तीन के बीच समझौते को मंजूरी

           प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय तथा फिलिस्तीन के कृषि मंत्रालय के बीच कृषि सहयोग पर आधारित समझौते को पूर्व प्रभाव से अपनी मंजूरी दे दी है।

       फिलिस्तीन के विदेश मंत्री के भारत के दौरे के समय मई 2017 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते में फिलिस्तीन की पशुपालन सेवाओं और पशुधन स्वास्थय का क्षमता विकास सहित कृषि अनुसंधान, पशुपालन के क्षेत्र में सहयोग, सिंचाई और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में सहयोग के प्रावधान शामिल है। पादप और मृदा पोषण, स्वच्छता और आधुनिक स्वच्छता विधान तथा पौधा संरक्षण पशुपालन, आधुनिक सिंचाई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुभवों के आदान-प्रदान सहित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण आदि जैसे क्षेत्रों तक भी इसका विस्तार किया जाएगा। 

         समझौते के तहत, इसके उद्देश्यों तक पहुंचने के लिए कार्यक्रम और कार्ययोजनाएं निर्धारित करने के लिए एक कृषि परिचालन समिति गठित की जाएगी, जो सहयोग के एजेंडे का निर्धारण भी करेगी।

Wednesday, 7 June 2017

देश के 673 में 125 कृषि विज्ञान केन्द्र जनजातीय बाहुल्य क्षे़त्रों में

          केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि सदियों से जनजातियों ने कृषि जैव-विविधता बनाने एवं संरक्षण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विगत तीन वर्षो में जनजातीय किसानों द्वारा कुल 5000 से अधिक प्रजातियों के पंजीयन हेतु कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से भारत सरकार की संस्था पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण को आवेदन किया गया है जो कि भविष्य में जलवायु अनुकूल प्रजाति के विकास में निर्णायक भूमिका अदा करेगी। 

      केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह बात नई दिल्ली में जनजातीय क्षेत्रों के किसानों के सशक्तिकरण पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कही। इस मौके पर केन्द्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुआल ओरम भी उपस्थित थे। कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में जनजातियों का यदि उत्थान करना है तो कृषि के नये-नये आयामों को इनके खेतों तक पहुंचाना पड़ेगा, साथ ही साथ इस बात का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है कि हम इन क्षेत्रों को प्रकृति की धरोहर मान कर जैविक एवं नैसर्गिक खेती की ओर अग्रसर करें। इन क्षेत्रों में हमें मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, फल, फूल, सब्जियों के नये बीज व प्रजातियों को प्रतिस्थापित करना होगा, साथ ही साथ समेकित प्रबंधन, वर्षा आधारित कृषि की नवीन तकनीक, जल संरक्षण की उचित व्यवस्था के साथ-साथ सिंचाई की नवीन तकनीक, नवीन कृषि यंत्रों, पंक्ति बुआई पद्धति आदि अपनाना होगा। साथ ही साथ एकीकृत फसल प्रणाली, एकीकृत फार्मिंग सिस्टम माड्यूल पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

               सिंह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र के जोत का आकार छोटा है, इसलिए इनके जोत के आकार के अनुसार नवीन कृषि व संबंधित तकनीकियों के प्रयोग से लाभ होगा, जिससे हम इन क्षेत्रों के कृषि विकास की परिकल्पना को सरल कर सकते है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि पूरे देश मे 673 कृषि विज्ञान केन्द्र है, जिनमे से 125 जनजातीय बाहुल्य वाले क्षे़त्रों में कार्य कर रहे हैं। स्थापित संस्थानों व केन्द्रों पर होने वाले व्यय के अतिरिक्त प्रतिवर्ष भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विशिष्ट कार्यों हेतु लगभग 75 से 100 करोड़ रूपये स्वीकृत किये जाते हैं जिससे विभिन्न प्रकार की परियोजनाएं सुचारू रूप से कार्यरत रहें। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा मशरूम, मछली पालन, मुर्गी पालन (बैकयार्ड पोल्ट्री), देशी प्रजातियों के चूजों की समुचित व्यवस्था, सूकर पालन, मधुमक्खी पालन आदि उपलब्ध कराई जा रही है जो सीमित संसाधनों के बावजूद जनजातियों के आय को 2022 तक दुगनी करने में सहायक सिद्ध हो पायेगा। 

            राधा मोहन सिंह ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने विगत तीन वषों में जनजातीय क्षेत्रों को सुदृढ़ करने हेतु अनेक प्रयास किये हैं। जहां आसाम एवं झारखंड में नये केन्द्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान स्थापित किये गये हैं वहीं उत्तर पूर्वी क्षेत्र में 6 महाविद्यालयों को स्थापित किया गया है। इन क्षे़त्रों में 10 नये कृषि विज्ञान केन्द्र भी खोले गये हैं। आई.सी.ए.आर. के सभी  संस्थानों को निष्चित रूप से कुछ धनराशि जनजातीय क्षेत्रों में कार्य करने के लिए स्वीकृत की जाती है। इस लिए सभी संस्थान जनजातीय क्षेत्रों में फसल उत्पादन, बागवानी, पशुपालन, मछली उत्पादन, आदि क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में कार्यरत केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान वहां की जनजातियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर कार्य कर रहे हैं।

       केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि मौसम के अनुकूल फसलों का चयन एवं प्रजातियों को उगाने का अद्भूत ज्ञान जनजातियों में पाया जाता है। वर्षो तक एक ही क्षेत्र मे रहने, भ्रमण करने एवं वन-संपदा के संपर्क मे रहने से इनको पौधे की पहचान अत्यधिक रहती है जो कि किसी भी विषय-विशेषज्ञ से कम नहीं होती । पौध विज्ञान के खोजकर्ता को ऐसी अनुभवी जनजातियों की पहचान कर उनके अनुभव को उपयोग में लाना चाहिए। सिंह ने कहा कि कृषि के दृष्टिकोण से जनजातीय क्षेत्र बहुत ही उपजाऊ है। रसायनो के पहुच से दूर ये क्षेत्र कार्बनिक खेती व टिकाऊ खेती के लिए जानी जाती हैं। यहां के उत्पादों में विशेष गुण पाये जाते हैं, जैसे कड़कनाथ मुर्गी के मांस को विश्व के सबसे स्वादिष्ट एवं उपयोगी माना गया है।

              आवश्यकता इस बात की है कि इन क्षेत्रों में प्रचलित फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यहां के उत्पादों के विशेष गुणों एवं स्वाद का प्रचार प्रसार कर उनकी मांग बढ़ाई जाए जिससे यहां के किसानों की आमदनी बढ़ सके। इन क्षेत्रों में ऐसी-ऐसी फसलें आज भी विद्यमान हैं जैसे-नाईजर, तिल, मोटे अनाज; कोदो, काकुन, कुटरी, रागी इत्यादि जो औषधीय गुणों वाली होने के साथ-साथ काफी उच्च गुणवत्ता वाली हैं। इन क्षेत्रों में दलहन व मक्का मुख्य रूप से उगायी जाती है व इनकी उत्पादकता बढ़ाने के तमाम अवसर हमारे पास हैं। सिंह ने बताया कि जनजातियों द्वारा अनाज भंडारण एवं ग्रामीण स्तर पर प्रसंस्करण की विधियाँ भी काफी प्रचलित एवं महत्वपूर्ण हैं जिनको वैज्ञानिक अध्ययन के बाद अन्य क्षेत्रों में भी फैलाया जाना लाभदायक सिद्ध हो रहा है। 

       केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि विभिन्न पहलुओं को देखते हुए यह बात महत्वपूर्ण है कि जनजातीय युवाओं के लिए शिक्षा का पाठयक्रम एवं संरचना ऐसा बनाया जाये कि उनके व्यावहारिक ज्ञान को डिग्री या डिप्लोमा का रूप देकर इनकी दक्षता सुधार की जाये जैसे- कपड़े, आभूषण, मेटल क्राफ्ट, बाँस का उत्पाद, बर्तन बनाना इत्यादि जिससे इन जनजातियों का उत्पाद अधिक मात्रा मे बाजार को आये एवं बाजार से अधिक पैसे का प्रवाह इन इलाकों में हो सके।

Thursday, 1 June 2017

भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व अग्रणी, उत्पादकता मिशन को 825 करोड़

          केन्द्रीय कृषि एवं किसान मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि भारत 15 वर्षों से दुग्‍ध उत्‍पादन के क्षेत्र में विश्‍व अग्रणी हैं। यह सफलता छोटे डेयरी किसानों, दुग्‍ध उत्‍पादकों, प्रसंस्‍करणकर्ताओं, नियोजकों, संस्‍थानों तथा अन्‍य सभी पणधारियों के कारण है। 

           उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन में हम लगातार प्रगति कर रहे हैं लेकिन अभी भी मीलों का सफर तय करना है ताकि हम देश के हर बच्‍चे को दूध सहित पर्याप्‍त पोषण दे सकें। कृषि मंत्री ने यह बात पूसा, नई दिल्ली में विश्व दुग्ध दिवस पर आयोजित समारोह में कही। कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में 2011-14 में 398 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ था लेकिन 2014-17 में यह 465.5 मिलियन टन हो गया जो कि 16.9ऽ की वृद्धि है। इसी तरह 2011-14 में किसानों की आमदनी रु. 29 प्रति लीटर थी जो 2014-17 में रु. 33 प्रति लीटर हो गयी जो कि 13.79ऽ की वृद्धि है।

         सिंह ने कहा कि देशी गोपशुओं की उत्‍पादकता को बढ़ाने के लिए देशी नस्‍लों के विकास और संरक्षण हेतु आबंटन को कई गुना बढ़ाया गया है। देश में पहली बार राष्‍ट्रीय गौकुल मिशन नामक एक नई पहल की गई। इसका उद्देश्‍य देशी बोवाईन नस्‍लों का संरक्षण तथा विकास करना है। इस मिशन के अंतर्गत मुख्यतः गोकुल ग्रामो की स्थापना करना, फील्ड परफॉरमेंस रिकॉर्डिंग करना, गोपालको एवं गौपालन से संबंधित संस्थानों को प्रति वर्ष सम्मानित करना, बुलमदर फर्म्स को सुदृढ़ करना, देसी नस्ल के उच्च अनुवांशिक गुणवता के साँड़ को वीर्य उत्पादन केन्द्रों में अधिक संख्या में शामिल करना इत्यादि है।

             देशी नस्‍लों का समग्र और वैज्ञानिक रूप से विकसित तथा संरक्षित करने के लिए उत्‍कृष्‍टता केंद्र के रूप में कार्य करने हेतु दो राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्रों की स्‍थापना की जा रही है। राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र देशी जर्मप्‍लाज्‍म का भण्‍डार होने के अलावा देश में प्रमाणित जेनेटिक्‍स के स्रोत भी होंगे। मध्‍य प्रदेश तथा आंध्र प्रदेश दोनों राज्‍यों को क्रमश: उत्‍तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में एक-एक राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र की स्‍थापना हेतु 25- 25 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। आंध्र प्रदेश का राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र लगभग तैयार है। कृषि मंत्री ने देशी नस्लों के बारे में बताया कि उष्‍मा–साध्‍य तथा रोग प्रतिरोधी होने के अलावा गायों की देशी नस्‍लें ए 2 टाइप का दूध उत्‍पादित करने के लिए जानी जाती हैं जो विभिन्‍न पुरानी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं, जैसे ह्दय तथा रक्‍त वाहिकाओं संबंधी मधुमेह तथा स्‍नायु संबंधी विकारों से बचाने के अलावा कई अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी लाभ प्रदान करता है। 

            उन्होंने कहा देश में ए 2 ए 2 दूध को अलग से बेचे जाने की आवश्‍यकता है। सिंह ने कहा कि दूध की लगातार बढ़ती मांग पूरा करने तथा किसानों के लिए दुग्‍ध उत्‍पादन को और भी लाभदायक बनाने के लिए भारत सरकार ने एक नई योजना राष्ट्रीय बोवाईन उत्पादकता मिशन को 825 करोड़ रुपए के आबंटन के साथ अनुमोदित किया है। देश में पहली बार राष्‍ट्रीय गौकुल मिशन के अंतर्गत ई पशु हाट पोर्टल स्थापित किया गया है। यह पोर्टल गुणवत्‍तापूर्ण बोवाईन जर्मप्‍लाज्‍म की उपलब्‍धतता के संबंध में प्रजनकों और किसानों को जोड़ने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे किसान एवं प्रजनक देशी नस्ल की गाय एवं भैंसो को खरीद एवं बेच सकेंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का उद्देश्‍य किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करना है। इस प्रक्रिया में डेयरी क्षेत्र एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभायेगा। 

       उन्होंने कहा कि सभी पणधारियों को इस उद्देश्‍य को प्राप्‍त करने के लिए प्रयास करने होंगे। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने गौपालकों को राष्ट्रीय गोपाल रत्न और कामधेनू एवार्ड 2917 पुरस्कार भी प्रदान किया। ये दोनों पुरस्कार वर्ष 2017 से शुरू किए गये हैं।



ओडिशा के रायगढ़ में मेगा फूड पार्क

          खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने ओडिशा के रायगढ़ में राज्‍य के पहले मेगा फूड पार्क- एमआईटीएस मेगा फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड- का उद्घाटन किया। वर्तमान सरकार द्वारा पिछले तीन वर्षों में संचालित किया जाने वाला यह सातवां मेगा फूड पार्क है।

          इस अवसर पर पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र प्रधान और खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग राज्‍य मंत्री साध्‍वी निरंजन ज्‍योति भी उपस्थित थीं। इस अवसर पर श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के विजनरी निर्देशन में खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्रालय उद्योग को प्रोत्‍साहन देने पर बल दे रहा है, ताकि कृषि क्षेत्र का विकास हो और किसानों की आय दोगुनी करने में प्रमुख योगदानकर्ता बनें तथा सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को प्रोत्‍साहित करे। खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्रालय मूल्‍य संवर्धन करके तथा सप्‍लाई चेन के प्रत्‍येक चरण में बर्बादी कम करने के लिए देश में मेगा फूड पार्क योजना लागू कर रहा है। 

              मेगा फूड पार्क खाद्य प्रसंस्‍करण के लिए आधुनिक बुनियादी सुविधाएं उपलब्‍ध कराते हैं और साथ-साथ खेत से बाजार तक वैल्‍यू चेन प्रदान करते हैं। इसमें क्‍लस्‍टर आधार दृष्टिकोण को अपनाया जाता है। सामान्‍य सुविधाएं तथा सहायक अवसंरचना सृजन केन्‍द्रीय प्रसंस्‍करण केन्‍द्र में किया जाता है और प्राथमिक प्रसंस्‍करण तथा भंडारण के लिए सुविधाएं प्राथमिक प्रसंस्‍करण केन्‍द्रों (पीपीसी) तथा संग्रह केन्‍द्रों (सीसी) के रूप में खेत के निकट प्रदान कराई जाती हैं। योजना के अंतर्गत भारत सरकार प्रत्‍येक मेगा फूड पार्क परियोजना को 50.00 करोड़ रुपये तक की वित्‍तीय सहायता देती है।

              श्रीमती बादल ने कहा कि 80.17 करोड़ रुपये की लागत से 50.05 एकड़ भूमि में मेगा फूड पार्क स्‍थापित किया गया है। भारत सरकार ने परियोजना को 50.00 करोड़ रुपये की वित्‍तीय सहायता प्रदान की है। फूड पार्क में एसएमई के लिए पूरी तरह से संचालित औद्योगिक शेड सुविधा, प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए विकसित औद्योगिक प्लॉट, 12 टीपीएच का चावल प्रसंस्‍करण परिसर, 10,000 एमटी क्षमता का ड्राई वेयर हाउस, 2500 एमटी क्षमता का शीत भंडारण गृह, बहुखाद्य प्रसंस्‍करण सुविधाएं आदि हैं। पार्क में कार्यालय के लिए साझा प्रशासनिक भवन है।  इसके अतिरिक्‍त इसका उपयोग उद्यमियों तथा काशीपुर, पद्मपुर, उमेरकोट, कोरापुट, दिगापहंडी और तथा खोरधा के छह प्राथमिक प्रसंस्‍करण केन्‍द्र करते हैं।

           उन्‍होंने कहा कि इस मेगा फूड पार्क की आधुनिक अवसंरचना और सुविधाओं से किसानों, प्रसंस्‍करणकर्ताओं तथा ओडिशा के उपभोक्‍ताओं को लाभ मिलेगा और ओडिशा राज्‍य में खाद्य प्रसंस्‍करण क्षेत्र को प्रोत्‍साहित करेगा। मेगा फूड पार्क से केवल रायगढ़ के लोग ही लाभान्वित नहीं होंगे, बल्कि पड़ोस के नारंगपुरा, गंजम तथा खोरधा जिले के लोगों को भी लाभ मिलेगा।              

दुनिया का सबसे बड़ा जेवर एयरपोर्ट

दुनिया का सबसे बड़ा जेवर एयरपोर्ट    जेवर (गौतम बुद्ध नगर)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहाँ कहाकि बेटी तो बेटी ही होती...