दुनिया के लिए खतरे की घंटी !
ग्रीनलैंड में इस साल रिकॉर्ड गर्मी पड़ी जिससे भारी मात्रा में बर्फ पिघली। खबर है कि नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 2100 तक सागरों में तीन से चार फीट पानी अकेले ग्रीनलैंड में पिघलने वाली बर्फ से बढ़ सकता है. इतना पानी दुनिया के कई हिस्सों को डुबोने के लिए काफी होगा।
विशेषज्ञों की मानें तो ग्रीनलैंड में बर्फ की हलचल पर नजर रखने के लिए अमेरिकी सागर विज्ञानी डेविड हॉलैंड वहां कुछ उपकरण लगा रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो वह कहते हैं, बर्फ की चादर वाले हमारे हिस्से में हम बदलाव देख रहे हैं। उत्तर में भी और दक्षिण में भी। हम इस समस्या से जुड़े वैज्ञानिक प्रमाण जमा कर रहे हैं।
खबर है कि उम्मीद है कि इनका इस्तेमाल होगा और ढंग की नीतियां बनेंगी और ढंग के फैसले होंगे। जिस बर्फ पर हॉलैंड और उनके साथी ब्रायन उपकरण लगा रहे हैं, वह हजारों साल पुरानी है. लेकिन इस साल ग्रीनलैंड में जिस तरह रिकॉर्ड गर्मी पड़ी है, उसे देखते हुए अगले एक या दो साल में यह बर्फ शायद ना बचे। इससे दुनिया भर के समंदरों में पानी और बढ़ेगा।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल गर्मियों का मौसम खत्म होने तक ग्रीनलैंड में 440 अरब मीट्रिक टन तक बर्फ पिघल सकती है। इससे इतना पानी बनेगा कि ग्रीस जैसा देश एक फुट पानी में जलमग्न हो जाए। जाहिर है कि दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड में हालात तेजी से बदल रहे हैं।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल गर्मियों का मौसम खत्म होने तक ग्रीनलैंड में 440 अरब मीट्रिक टन तक बर्फ पिघल सकती है। इससे इतना पानी बनेगा कि ग्रीस जैसा देश एक फुट पानी में जलमग्न हो जाए। जाहिर है कि दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड में हालात तेजी से बदल रहे हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो ग्लेशियर सिमट रहे हैं और समंदर का जलस्तर बढ़ रहा है। हॉलैंड इसे दुनिया का अंत कहते हैं। उनका इशारा भूगोल से ज्यादा भविष्य की तरफ है। विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा भविष्य जो अब से ज्यादा गर्म होगी, जिसमें अब से ज्यादा पानी होगा।
खबर है कि हॉलैंड बताते हैं कि ग्रीनलैंड में हेलहाइम इलाके में 2005 से अब तक ग्लेशियर दस किलोमीटर से ज्यादा सिमट गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक अगस्त 2019 ऐसी तारीख थी जब एक ही दिन में ग्रीनलैंड में सबसे ज्यादा बर्फ पिघली. इस एक दिन में 12.5 अरब टन बर्फ पानी बन गई।

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