Thursday, 28 September 2017

देश में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा का विशाल नेटवर्क

    नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा देश में पहली बार कृषि ज्ञान प्रबंध का रोडमैप तैयार करने हेतु राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में देश भर से 300 से अधिक प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों एवं सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के प्रतिभागी के रूप में हिस्सा ले रहे है।

   केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश की 58 प्रतिशत आबादी आज भी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। उद्योगों एवं सेवा क्षेत्र में हो रही प्रगति के बावजूद कृषि क्षेत्र को ही शीर्ष रोजगार दाता का स्थान प्राप्त है। देश की कृषि में लघु एवं सीमांत किसानों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। परंपरागत कृषि एवं निम्न उत्पादकता के कारण ये कड़ी मशक्कत के बावजूद अधिक उपज हासिल नहीं कर पाते हैं। आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि प्रणालियों से संबंधित जानकारियों के अभाव में प्रायः यह स्थिति देश के समूचे कृषि क्षेत्र में निरंतर बनी हुई है।
      केन्द्रीय कृषि मंत्री सिंह ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नेतृत्व में देश भर में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा का विशाल नेटवर्क आज अस्तित्व में है। इसके अंतर्गत 102 से अधिक कृषि अनुसंधान संस्थान, 73 केन्द्रीय एवं राज्य कृषि विष्वविद्यालय तथा 690 से अधिक कृषि विज्ञान केन्द्र कार्यरत हैं। इनमें नित रोजाना कृषि एवं सम्बद्ध विषयों से संबंधित अनुसंधानों से उन्नत कृषि तकनीकों, अधिक उपज देने वाली फसलों एवं उत्पादक पशुओं का विकास तथा अन्य कार्यकलाप किए जा रहे हैं। 
   इस अनुसंधान नेटवर्क द्वारा तीव्र गति से कृषि उपयोगी जानकारियों एवं सूचनाओं का सृजन हो रहा है। देश में कृषि सूचनाओं के प्रसार-प्रचार से संबंधित तंत्रों के अलग-अलग स्तरों पर काम करने तथा सीधे किसानों तक पहुंच बनाने में अधिक सफल नहीं होने के कारण अधिकांश किसानोपयोगी अनुसंधान परिणामों को ग्रामीण स्तर तक पहुंचने में लम्बा समय लग जाता है। 
     केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर ऐसी उपयोगी जानकारियां कम से कम समय में कृषक समुदाय तक पहुंचाने हेतु कई पहल हाल के समय में की गई हैं। इनमें फार्मर पोर्टल, किसान कॉल सेंटर, फसल बीमा पोर्टल, राइस एक्सपर्ट ऐप, काजरी कृषि ऐप, पूसा कृषि ऐप, एग्रो कलेक्ट-कृषि ज्ञान ऐप, ई-नाम पोर्टल आदि का खासतौर पर उल्लेख किया जा सकता है।
      भारतीय कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय, नई दिल्ली द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय विशिष्ट कार्यशाला को चार सत्रों में विभाजित किया गया है, जिनमें कृषि ज्ञान प्रबंध की वर्तमान स्थिति, उच्च कृषि लाभ हेतु डेटा प्रबंधन एवं सूचना भंडारण, ज्ञान प्रबंधन में मीडिया की भूमिका तथा कृषि ज्ञान प्रबंध के ढांचे में बदलाव आदि विषयों पर कृषि वैज्ञानिकों और आईटी एक्सपर्ट्स द्वारा विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

Tuesday, 26 September 2017

भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक, देश के किसानों को श्रेय

    आणंद-गुजरात। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि दूध का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी परियोजना (एनडीपी) का उद्देश्‍य दुधारू पशुओं की उत्पादकता को बढ़ाना तथा इसके द्वारा दूध की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए दूध उत्पादन बढ़ाना है। 

   सिंह ने यह बात आज टीके पटेल सभागार, एनडीडीबी आणंद, गुजरात में कही। इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्य मंत्री विजयभाई रुपाणी और केन्द्रीय राज्य मंत्री, कृषि एवं किसान कल्याण पुरूषोतम रुपाला भी मौजूद थे। राधा मोहन सिंह ने कहा की कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से उच्च आनुवंशिक गुण वाले सांड़ों के वीर्य का उपयोग करके आनुवंशिक प्रगति में तेजी लाने और साथ ही किसानों को अपने पशुओं को संतुलित आहार देने से, उत्पादकता में वृद्धि हो रही है। इनपुट के प्रभावी उपयोग हेतु संतुलित आहार को बढ़ावा देने के लिए एनडीपी की पहल से किसानों को कम आहार लागत के साथ उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिल रही है। 
     सिंह ने कहा कि देश पिछले दो दशकों से विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है और इसका श्रेय देश के किसानों को जाता है। चूँकि हमारे देश के दो तिहाई से अधिक नागरिक ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, इसलिए किसानों को अधिक समृद्ध बनाने की जरूरत है, जिसके लिए डेरी क्षेत्र महत्वपूर्ण है। 
        केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि एनडीडीबी ने अपनी शुरूआत से ही, 'ऑपरेशन फ्लड’ सहित कई बड़े डेरी विकास कार्यक्रमों को देश में कार्यान्वित किया है। भारत दूध उत्पादन में पहले नंबर पर है ओर विश्व के कुल दूध उत्पादन में 19 प्रतिशत का योगदान देता है। 2011-14 के सापेक्ष 2014-17 क दौरान डेयरी किसानों की आय में 13.79 की प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दुग्ध उत्पादन जो कि वर्ष 2015-16 के दौरान 155.49 मिलियन टन थी, 2019-20 में उसे बढ़ाकर 200 मिलियन टन करने की योजना है। 
     वर्तमान में राष्ट्रीय डेरी योजना (एनडीपी) और हाल ही में घोषित डेरी प्रसंस्‍करण और बुनियादी ढॉंचा विकास निधि (डीआईडीएफ) के कार्यान्‍वयन में एनडीडीबी की भूमिका काफी अग्रणी है। केन्द्र सरकार ने 2017-18 से 2028-29 की अवधि के दौरान 10,881 करोड़ रुपये की लागत से दुग्ध प्रसंस्करण और बुनियादी विकास निधि (डीआईडीएफ) स्थापित की है।
       डीआईडीएफ का उद्देश्य है दूध को ठढ़ां रखने के लिए बुनियादी संरचना स्थापित करके और दूध में मिलावट की जांच के लिए इलेक्ट्रानिक उपकरण स्थापित करके, प्रसंस्करण सुविधा का निर्माण आधुनिकीकरण विस्तार करके दूध की खरीद के लिए एक कारगर प्रणाली विकसित की जाएगी और दुग्ध संघों दुग्ध उत्पादक कंपनियों के लिए मूल्य संवर्धित उत्पादों के लिए शिक्षण संस्थान स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा। 
     एनडीपी का उद्देश्य है दुधारु पशुओं के उत्पादकता में वृद्धि के लिए सहायता करना और इस प्रकार दूध की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए दूध उत्पादन में वृद्धि। ग्रामीण दूध उत्पादकों को संगठित दूध प्रसंस्करण सेक्टर सहित अधिक पहुंच हेतु अधिक सहायता प्रदान करना। वर्ष 2015-16 के दौरान एनडीपी को 4 राज्यों, (छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना और उतराखंड) में विस्तारित किया गया है और इसके कार्यान्वयन की अवधि 2018-19 तक बढ़ा दी गयी है। 
    राधा मोहन सिंह ने कहा कि संकल्प से सिद्धि मिशन के तहत, भारत छोड़ो आंदोलन की 75 वीं वर्षगांठ पर, प्रधानमंत्री के सक्षम नेतृत्व के अंतर्गत, केंद्र सरकार ने सन् 2022 तक हमारे किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है प्र् इसके लिए हाल ही में सात सूत्री रणनीति का अनावरण किया है। डेरी क्षेत्र में भी कई योजनाओं के माध्यम से कृषि मंत्रालय इसी दिशा में काम कर रहा हैं। 
     केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि उनका अनुभव यह बताता है कि डेरी विकास के लिए उत्पादक केन्द्रित संस्थाएं बहुत महत्वपूर्ण हैं। सिंह ने कहा कि डेरी उत्‍कृष्‍टता पुरस्‍कारों का चयन निष्‍पक्षता से किया गया है तथा जिन उत्पादक केन्द्रित संस्‍थाओं ने संचालन, प्रशासन और समावेशन में उत्कृष्टता हासिल की है, उन्हें डेरी उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 
     जहॉं विजेताओं को उनके प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, वहीँ यह उम्मीद है कि इन रोल मॉडलों से सीख कर अन्‍य को भी उत्कृष्टता प्राप्त करने की प्रेरणा मिलेगी। राधा मोहन सिंह ने पुरस्कार विजेताओं को अपनी शुभकामनाएं दी।

Tuesday, 19 September 2017

कृषि क्षेत्र को सर्वाधिक प्राथमिकता, 62376 करोड़ आवंटित

         नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि कृषि के महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र को सर्वाधिक प्राथमिकता दी है।

    वित्त मंत्रालय ने बजट 2017-18 में इस क्षेत्र को 62376 करोड़ रूपए आवंटित करने की घोषणा की है। सरकार का प्रयोजन यह रहा है कि फसल उत्पादकता में वृद्धि करने के साथ किसानों को उनके उत्पादों का पारिश्रमिक मूल्य दिलाया जाए तथा डेयरी पशु पालन, मत्स्य पालन विकास पर विशेष ध्यान देने के साथ कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं विस्तार प्रणाली को भी आगे बढ़ाया जाए। 
     राधा मोहन सिंह ने कहा कि यह हम सबका दायित्व है कि हम कृषि क्षेत्र को सुधारने के लिए विशेष प्रयास करें ताकि यह व्यापार का एक सशक्त क्षेत्र बन जाए। सिंह ने ने यह बात विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय आयोजित रबी सम्मेलन 2017-18 में कही। 
      राधा मोहन सिंह ने कहा कि रबी सम्मेलन में विभिन्न राज्य सरकारों के पदाधिकारियों के परामर्श से फसलवार लक्ष्य निर्धारित करते हुए विभिन्न राज्यो को आदान आपूर्ति का मामला सुनिश्चित करना होता है। इसके साथ इस बात की भी समीक्षा की जाती है कि कृषि क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकी और नवाचार को भी अपनाया जाए।
     इस सम्मेलन के माध्यम से आने वाले रबी मौसम के बारे में सार्थक परिचर्चा, कृषि क्षेत्र से जुड़े विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान एवं भावी कार्यनीति के लिए मंच तैयार किया जाता है। सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का सपना देखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारी सरकार द्वारा कई स्कीम और कार्यक्रम शुरू किए हैं।
     प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, मृदा स्वास्थ्य स्कीम, नीम लेपित यूरिया और ई-राष्ट्रीय कृषि मंड़ी स्कीमें कुछ विशेष स्कीमें हैं जिनका उद्देश्य यह है कि हमारे किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि हो।
       केन्द्रीय कृषि मंत्री ने इस मौके पर बताया कि इस दिशा में कार्यनीति पर काम करने के लिए उन्होंने राज्य सरकारों को भी लिखा है। कहा है कि ऐसी कार्यनीति बनाते समय राज्य सरकारों को उत्पादन से लेकर उत्पादन उपरांत के कार्यकलापों पर भी ध्यान देना होगा। सिंह ने कहा कि विभिन्न फसलों में फसल उत्पादन प्रौद्योगिकी और उत्पादकता में सुधार लाने के लिए कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएसएफएम), राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम), राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) राष्ट्रीय कृषि विस्ता्र एवं प्रौद्योगिकी मिशन और प्रत्यक्ष लाभ स्थानांतरण (डीबीटी) जैसी पहल शुरू की हैं। 
      राधा मोहन सिंह ने बताया कि तिलहनी फसलों के उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए 2014-15 में राष्ट्रीय तिलहन और ऑयल पाम मिशन (एनएमओओपी) शुरू किया गया है। जिनमें तीन लघु मिशन (एमएम) नामत: तिलहन एमएम-।, ऑयल पाम एमएम-।। और वृक्ष जन्य एमएम-।।। शामिल हैं। 
     सिंह ने इस बात पर खुशी जताई कि कृषि और संबंधित क्षेत्रों में 4 प्रतिशत लक्षित वार्षिक विकास करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की विभिन्न स्कीमों को विशेष मिशनों, स्कीमों और कार्यक्रमों में परिवर्तित किया गया है। सभी हितधारकों द्वारा संयुक्त प्रयास किए जाने के फलस्वरूप देश में 2016-17 के दौरान कुल खाद्यान्न उत्पाादन 275.68 मिलियन टन अनुमानित है जो कि अब तक का रिकार्ड उत्पादन है।
     मौजूदा वर्ष का उत्पा्दन खाद्यान्न के पिछले 5 वर्षों के औसत उत्पादन (वर्ष 2011-12 से 2015-16) की तुलना में 18.67 मिलियन टन अधिक है। यह उत्पादन 2015-16 के खाद्यान्न उत्पादन की तुलना में 24.11 मिलियन टन अधिक है। 2016-17 में देश में चावल का कुल उत्पादन रिकार्ड 110.15 मिलियन टन अनुमानित है। 
      यह पिछले 5 वर्षों के 105.42 मिलियन टन औसत चावल उत्पादन की तुलना में 4.73 मिलियन टन अधिक है। 2016-17 में चावल के उत्पादन में 2015-16 के दौरान 104.41 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में 5.74 मिलियन टन की पर्याप्त वृद्धि हुई है। गेहूं का उत्पादन भी 98.38 मिलियन टन अनुमानित है जो कि अपने आप में एक रिकार्ड है। 2016-17 में गेहूं का उत्पा्दन 2016 के दौरान 92.29 मिलियन टन की तुलना में 6.09 मिलियन टन अधिक है। 
       केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार प्रमुख कृषि जिंसों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करके भी किसानों के हितों की रक्षा कर रही है।

दुनिया का सबसे बड़ा जेवर एयरपोर्ट

दुनिया का सबसे बड़ा जेवर एयरपोर्ट    जेवर (गौतम बुद्ध नगर)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहाँ कहाकि बेटी तो बेटी ही होती...