Wednesday, 11 September 2019

एशिया के 400 मिलियन लोगों को बिजली की सुविधा नहीं

    केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि भारत ने पिछले पांच वर्षों के दौरान अनेक युगांतकारी नीतियां बनाई हैं एवं पहल की हैं, ताकि देश में रहने वाले 1.3 अरब से भी अधिक लोगों के लिए ऊर्जा न्याय को सुनिश्चित किया जा सके। 

  उन्होंने कहा कि अपर्याप्त एवं असंतुलित ऊर्जा अवसंरचना के कारण एशियाई क्षेत्र के 400 मिलियन लोगों को बिजली की सुविधा प्राप्त नहीं है। इसी तरह गांवों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ बिजली नहीं मिल पा रही है। अतः सुरक्षित, स्थिर, किफायती और बेहतर ऊर्जा सभी देशों की सरकारों का एक महत्वपूर्ण दायित्व है। 
  भारत के ऊर्जा विजन के बारे में कहा कि इसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2016 में की और यह ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा निरंतरता और ऊर्जा सुरक्षा नामक चार स्तम्भों पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘पिछले पांच वर्षों के दौरान ऊर्जा नियोजन से जुड़े हमारे एकीकृत दृष्टिकोण के तहत भारत ऊर्जा न्याय के साथ ऊर्जा पहुंच पर विशेष जोर दे रहा है जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।’
   केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा है कि वैश्विक ऊर्जा खपत का एशिया की ओर उन्मुख होना एक वास्तविकता है और यह बदलाव ऊर्जा न्याय में निहित होना चाहिए। अबू धाबी में 8वीं एशियाई मंत्रिस्तरीय ऊर्जा गोलमेज बैठक के आरंभिक सत्र को संबोधित करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि अब हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि यह बदलाव ‘ऊर्जा न्याय’ में निहित हो, जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के ऊर्जा विजन के सबसे महत्वपूर्ण घटक के रूप में किया है।
   श्री प्रधान ने कहा कि उभरता एशिया आगामी 20 वर्षों में वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक संदर्भ में विकासशील अर्थव्यवस्थाएं वृद्धिशील वैश्विक विकास में 80 प्रतिशत योगदान करेंगी। इसमें भारत और चीन का योगदान 50 प्रतिशत से भी अधिक होगा। 
  श्री प्रधान ने कहा, ‘ऊर्जा पहुंच एवं जीवन यापन के उच्च मानक के साथ-साथ विकासशील देशों में बेहतर समृद्धि की बदौलत ही ऊर्जा की ज्यादा मांग सुनिश्चित होगी। ऊर्जा में दक्षता और स्वच्छ प्रौद्योगिकी के मद्देनजर कम आमदनी और प्रति व्यक्ति कम ऊर्जा खपत वाले देशों के लिए यह आवश्यक है कि उनकी पहुंच प्रौद्योगिकी और पूंजी तक निश्चित रूप से हो। इससे जीवाश्म ईंधन की आपूर्ति एवं कीमत के लिए अल्पकालिक कदम उठाने की तुलना में बेहतर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।’ 
  श्री प्रधान ने भारत के ऊर्जा विजन के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि इसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2016 में की और यह ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा निरंतरता और ऊर्जा सुरक्षा नामक चार स्तम्भों पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘पिछले पांच वर्षों के दौरान ऊर्जा नियोजन से जुड़े हमारे एकीकृत दृष्टिकोण के तहत भारत ऊर्जा न्याय के साथ ऊर्जा पहुंच पर विशेष जोर दे रहा है जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।’ 
   बाद में श्री प्रधान ने ‘सुरक्षित, किफायती एवं टिकाऊ ऊर्जा सेवाओं के लिए समावेशी पहुंच को आगे बढ़ाना’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘भारत में हमें 1.3 अरब से भी अधिक लोगों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ानी है जिनकी प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत वैश्विक औसत से कम है। अब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और इसकी ऊर्जा मांग दुनिया की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। कुल वैश्विक प्राथमिक ऊर्जा मांग में हमारी हिस्सेदारी वर्ष 2040 तक दोगुनी होकर 11 प्रतिशत हो जाएगी। हम देश में ऊर्जा मांग में इसी तरह की वृद्धि को ध्यान में रखते हुए तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए ऊर्जा क्षेत्र में समान अनुपात में व्यापक निवेश आवश्यक है।’
   श्री प्रधान ने कहा कि ऊर्जा नियोजन से जुड़े हमारे एकीकृत दृष्टिकोण के तहत ऊर्जा न्याय अपने आप में एक महत्वपूर्ण उद्देश्य होगा। इस संदर्भ में हम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य यानी एसडीजी 7 को जल्द प्राप्त करने के लिए प्रयासरत हैं। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए भारत में अनेक रूपांतरकारी नीतियां बनाई गई हैं एवं पहल की गई हैं।
   हम अपनी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का व्यापक विस्तार कर रहे हैं, चाहे वह विद्युत उत्पादन हो या अपेक्षाकृत ज्यादा नवीकरणीय एवं गैस आधारित बुनियादी ढांचागत सुविधाएं जैसे कि पाइपलाइन, सिटी गैस नेटवर्क, एलएनजी टर्मिनल हों। हमने 3 साल पहले उज्ज्वला योजना के तहत स्वच्छ रसोई ईंधन तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो दिन पहले ही 8 करोड़वां एलपीजी कनेक्शन सौंपा है। ‘नीली लौ क्रांति’ तेजी से अग्रसर है। एलपीजी कवरेज पांच साल पहले के 55 प्रतिशत से बढ़कर अब 90 प्रतिशत से भी अधिक हो गई है।
   भारत ने सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। इस वर्ष भारत ‘सौभाग्य’ के जरिये सभी घरों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है। भारत में स्वच्छ ढुलाई को भी उच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हम अप्रैल, 2020 तक बीएस-त्ध् से सीधे बीएस-ध्त् ईंधन को अपनाने जा रहे हैं। भारत वर्ष 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करके गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हो रहा है। हमने 16,000 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी गैस पाइपलाइन का निर्माण किया है और 11,000 किलोमीटर लंबी अतिरिक्त गैस पाइपलाइन का निर्माण कार्य जारी है।’ 
   उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि भारत जैव ईंधन से एक विमान की उड़ान संचालित कर अगस्त 2018 में चुनिंदा राष्ट्रों के प्रतिष्ठित क्लब में शामिल हो गया। अबू धाबी में आयोजित 8वीं एशियाई मंत्रिस्तरीय ऊर्जा गोलमेज बैठक के दौरान धर्मेन्द्र प्रधान ने अलग से अन्य देशों के कई राजनेताओं के साथ द्विपक्षीय चर्चाएं कीं। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के समकक्ष ऊर्जा एवं उद्योग मंत्री सुहैल मोहम्मद फराज अल मजरौई से भेंट की।

Tuesday, 10 September 2019

भारत-नेपाल साझेदारी का विस्तार

   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने आज दक्षिण एशिया की पहली सीमा पार जाने वाली पेट्रोलियम उत्पादों की पाइपलाइन का वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिये संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। यह पाइपलाइन बिहार के मोतिहारी से नेपाल के अमलेखगंज को जोड़ती है। 
 
   इस अवसर पर नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने महत्वपूर्ण संपर्क परियोजना के शीघ्र कार्यान्वयन पर प्रशंसा व्यक्त की। यह परियोजना निर्धारित समयसीमा से काफी पहले पूरी हो गई है।
   इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 69 किलोमीटर लंबी मोतिहारी-अमलेखगंज पाइपलाइन नेपाल के लोगों को किफायती लागत पर स्वच्छ पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराएगी। इस पाइपलाइन की क्षमता दो मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है।
   उन्होंने प्रधानमंत्री ओली की उस घोषणा का स्वागत किया, जिसमें नेपाल में पेट्रोलियम उत्पादों के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती करने की बात कही गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उच्चतम राजनीतिक स्तर पर नियमित मेल-मिलाप ने भारत-नेपाल साझेदारी के विस्तार के लिए एक अग्रगामी एजेंडा निर्धारित किया है।
   उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंधों का प्रगाढ़ होना जारी रहेगा तथा इनका अलग-अलग क्षेत्रों तक विस्तार होगा। प्रधानमंत्री ओली ने प्रधानमंत्री मोदी को नेपाल का दौरा करने का आमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

Monday, 9 September 2019

भारत-फ्रांस का व्‍यापार लक्ष्‍य 15 बिलियन यूरो

   उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि 2022 तक माल के व्‍यापार के निर्धारित लक्ष्‍य को 15 बिलियन यूरो तक पहुंचाने के लिए द्वीपक्षीय व्‍यापार की गति को कई गुना बढ़ाये जाने की जरूरत है।

   भारत और फ्रांस के मध्‍य सामरिक भागीदारी को भारत की विदेशी नीति का एक महत्‍वपूर्ण स्‍तंभ बताते हुए कहा कि भारत और फ्रांस शांति और स्थिरता के अग्रदूत के रूप में काम कर सकते हैं। 
  भारत और फ्रांस को घनिष्‍टता पूर्वक शांति और स्थिरता के अग्रदूत के रूप में काम करना चाहिए जलवायु परिवर्तन : भारत, पेरिस समझौते के लक्ष्यों को अग्रिम रूप से प्राप्‍त करने के लिए प्रतिबद्ध है, उन्‍होंने फ्रांसीसी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की। 
  आर्थिक मामलों की स्‍थाई समिति की अध्‍यक्ष और सीनेट सुश्री सोफी प्राइमास के नेतृत्‍व में फ्रांस के सांसदों के शिष्‍टमंडल के साथ आज दिल्‍ली में बातचीत करते हुए श्री नायडू ने विश्‍व में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए भारत और फ्रांस में नजदीकी सहयोग का आह्वान किया। 
   श्री नायडू ने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों सहित सभी देशों के साथ सदैव शांतिपूर्ण सह-अस्‍तित्‍व में विश्‍वास करता है। हम नहीं चाहते हैं कि कोई हमारे देश के अंदरूनी मामलों में हस्‍तक्षेप करे न ही हम स्‍वयं अन्‍य देशों के मामले में दखल देना चाहते हैं।
   उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद निरोध, अंतरिक्ष सहयोग, आर्थिक भागीदारी और अन्‍य क्षेत्रों में फ्रांस के साथ अपनी भागीदारी को बहुत महत्‍व देता है। यह देखते हुए उन्‍होंने दोनों देशों के बीच नजदीकी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारत-फ्रांस संसदीय मैत्री समूह की स्‍थापना का सुझाव दिया।
   उन्‍होंने स्‍मार्टसिटी पहल के तहत भारत के साथ भागीदारी करने के फ्रांस के निर्णय के बारे में प्रसन्‍नता जाहिर की और कहा कि भारत के विकास के लिए शहरी नवीकरण और स्‍वच्‍छ ऊर्जा में भारी निवेश की जरूरत है। दोनों देशों के बीच अधिक से अधिक व्‍यापार, प्रौद्योगिकी और पूंजी प्रवाह का आह्वान करते हुए श्री नायडू ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, भारत सरकार के लिए एक विश्‍वास का विषय है, उन्‍होंने पेरिस समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। 
   उन्‍होंने कहा कि भारत इस समझौते के लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के मार्ग पर अग्रसर है। उन्‍होंने इस बारे में विशेष रूप से ‘वन प्‍लैनिट समिट’ आयाजित करने के लिए फ्रांस की सराहना की। श्री नायडू ने नवम्‍बर 2018 में आयोजित प्रथम विश्‍व युद्ध की युद्ध विराम संधि के शताब्‍दी वर्ष समारोह के दौरान फ्रांस की अपनी यात्रा का स्‍मरण किया। 
   उन्‍होंने कहा कि इस युद्ध में अपना बलिदान देने वाले 9,000 से भी अधिक भारतीय वीरों की याद में विलर्स गुइस्‍लैन में पहले भारतीय युद्ध स्‍मारक का उन्‍होंने उद्घाटन किया था। इसरो और सीएनईएस के माध्‍यम से भारत और फ्रांस के बीच दीर्घकालीन और बहुमुखी अंतरिक्ष सहयोग का उल्‍लेख करते हुए श्री नायडू ने कहा हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Sunday, 8 September 2019

भारत-कोरिया की नौसेना को लॉजिस्टिक सहयोग

   रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोरिया गणराज्य की अपनी तीन दिन की यात्रा के दूसरे दिन सोल में कोरिया गणराज्य के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जियोंग कियोंगडू से बातचीत की।

  बातचीत में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की व्यापक समीक्षा की। दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और कोरिया गणराज्य के रक्षा सहयोग का मूल आधार विशेष रणनीतिक साझेदारी है। दोनों नेताओं ने सेना के स्तर पर जारी सहयोग तथा भारत और कोरिया के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। 
  दोनों मंत्रियों ने क्षेत्रीय तथा पारस्परिक हित के अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। रक्षा शैक्षिक आदान-प्रदान को मजबूत बनाने तथा एक-दूसरे की नौसेना को लॉजिस्टिक सहयोग बढ़ाने के बारे में दो प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ेगा। 
   राजनाथ सिंह ने कोरिया के राष्ट्रीय समाधि स्थल पर कोरिया देश के लिए प्राणों की आहूति देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री युद्ध स्मारक भी देखने गए, जहां कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय 60वें पैरा फिल्ड हॉस्पिटल को उसके असाधारण योगदान के लिए प्राप्त प्रशस्ति पत्र की प्रति भेंट की।

Monday, 2 September 2019

दुनिया के लिए खतरे की घंटी !

   ग्रीनलैंड में इस साल रिकॉर्ड गर्मी पड़ी जिससे भारी मात्रा में बर्फ पिघली। खबर है कि नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 2100 तक सागरों में तीन से चार फीट पानी अकेले ग्रीनलैंड में पिघलने वाली बर्फ से बढ़ सकता है. इतना पानी दुनिया के कई हिस्सों को डुबोने के लिए काफी होगा। 

   विशेषज्ञों की मानें तो ग्रीनलैंड में बर्फ की हलचल पर नजर रखने के लिए अमेरिकी सागर विज्ञानी डेविड हॉलैंड वहां कुछ उपकरण लगा रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो वह कहते हैं, बर्फ की चादर वाले हमारे हिस्से में हम बदलाव देख रहे हैं। उत्तर में भी और दक्षिण में भी। हम इस समस्या से जुड़े वैज्ञानिक प्रमाण जमा कर रहे हैं। 
  खबर है कि उम्मीद है कि इनका इस्तेमाल होगा और ढंग की नीतियां बनेंगी और ढंग के फैसले होंगे। जिस बर्फ पर हॉलैंड और उनके साथी ब्रायन उपकरण लगा रहे हैं, वह हजारों साल पुरानी है. लेकिन इस साल ग्रीनलैंड में जिस तरह रिकॉर्ड गर्मी पड़ी है, उसे देखते हुए अगले एक या दो साल में यह बर्फ शायद ना बचे। इससे दुनिया भर के समंदरों में पानी और बढ़ेगा।
   वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल गर्मियों का मौसम खत्म होने तक ग्रीनलैंड में 440 अरब मीट्रिक टन तक बर्फ पिघल सकती है। इससे इतना पानी बनेगा कि ग्रीस जैसा देश एक फुट पानी में जलमग्न हो जाए। जाहिर है कि दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड में हालात तेजी से बदल रहे हैं।
   विशेषज्ञों की मानें तो ग्लेशियर सिमट रहे हैं और समंदर का जलस्तर बढ़ रहा है। हॉलैंड इसे दुनिया का अंत कहते हैं। उनका इशारा भूगोल से ज्यादा भविष्य की तरफ है। विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा भविष्य जो अब से ज्यादा गर्म होगी, जिसमें अब से ज्यादा पानी होगा। 
  खबर है कि हॉलैंड बताते हैं कि ग्रीनलैंड में हेलहाइम इलाके में 2005 से अब तक ग्लेशियर दस किलोमीटर से ज्यादा सिमट गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक अगस्त 2019 ऐसी तारीख थी जब एक ही दिन में ग्रीनलैंड में सबसे ज्यादा बर्फ पिघली. इस एक दिन में 12.5 अरब टन बर्फ पानी बन गई।

Sunday, 1 September 2019

इंटरपोल के डेटाबेस में 100 मिलियन रिकॉर्ड

    इंटरपोल महासचिव जुरगेन स्टॉक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इंटरपोल के डेटाबेस से अवगत कराया। जिसमें 100 मिलियन रिकॉर्ड, सुरक्षित वैश्विक डेटा संचार चैनल (क्ष्-24/7) और अन्य उपकरण हैं। 

   जिनके माध्यम से इंटरपोल दुनिया भर में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता कर रहा है। उनका कहना था कि भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां विशेष रूप से सीमा नियंत्रण बिन्दुओं पर​​ इंटरपोल के उपकरणों और डेटाबेस का व्यापक उपयोग कर सकती हैं।
   श्री स्टॉक ने परिचालन सहयोग बढ़ाने का भी आश्वासन दिया। इंटरपोल महासचिव जुरगेन स्टॉक ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने श्री शाह द्वारा व्यक्त प्रतिबद्धता और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और आतंक के खिलाफ संघर्ष में इंटरपोल के यथा संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि इंटरपोल आतंकवाद, संगठित और उभरते हुए अपराधों और साइबर अपराधों पर विशेष रूप से ध्यान दे रहा है।
   बैठक के दौरान, श्री शाह ने 2022 में भारतीय स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के समारोह के हिस्से के रूप में नई दिल्ली में इंटरपोल महासभा की मेजबानी का प्रस्ताव रखा। उन्होंने सहायता के साथ आधारभूत संरचना देकर इंटरपोल ग्लोबल एकेडमी का क्षेत्रीय केन्द्र बनने की भारत की इच्छा व्यक्त की।
   श्री स्टॉक के साथ बातचीत में, गृह मंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, डर्टी मनी और मनी लॉन्ड्रिंग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीरो टॉलरेन्‍स दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने इंटरपोल से इन खतरों से लड़ाई को सबसे अधिक प्राथमिकता देने का आह्वान किया। श्री शाह ने न केवल एशियाई क्षेत्र में बल्कि दुनिया भर में इन खतरों से लड़ने के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक कार्य योजना बनाने की तत्काल आवश्यकता पर बल किया। 
   श्री शाह ने बताया कि भारतीय खुफिया और जांच एजेंसियों ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी दशकों पुरानी लड़ाई में समृद्ध और विविध अनुभव हासिल किए हैं। इस विशेषज्ञता का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करने के लिए इंटरपोल का भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करने के लिए स्वागत है। उन्होंने यूएपीए में हाल के संशोधनों का भी उल्लेख किया।
   गृह मंत्री ने रेड नोटिस के प्रकाशन में देरी के बारे में चिंता व्यक्त की और रेड नोटिस का शीघ्र प्रकाशन सुनिश्चित करने के लिए पूर्व परामर्श की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सहयोग से भारत रसूख वाले भगोड़े आर्थिक अपराधियों और आतंकवादियों का तेजी से पीछा कर सकेगा।

भारत और सिंगापुर के बीच रणनीतिक भागीदारी

    सिंगापुर के गृह और कानून मंत्री के. शनमुगम ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने बैठक के दौरान आपसी हित के द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। 

   केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत और सिंगापुर संबंध साझा मूल्यों और दृष्टिकोण, आर्थिक अवसरों और प्रमुख मुद्दों पर आपसी हितों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिंगापुर यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी में एक नई गति आई है।
   गृह मंत्री शनमुगम ने इस बात पर भी जोर दिया कि सिंगापुर भारत के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व देता है। दोनों नेताओं ने आतंकवाद और उग्रवाद से उत्पन्न चुनौतियों पर विचारों और चिंताओं का आदान-प्रदान किया।
   दोनों नेताओं ने सुरक्षा के मुद्दों पर मौजूदा द्विपक्षीय संस्थागत तंत्र को मजबूत करने पर सहमती व्यक्त की। दोनों पक्ष नशीले पदार्थों की तस्करी और आर्थिक अपराधों सहित अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराधों से निपटने में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए। सिंगापुर के मंत्री के. शनमुगम ने अमित शाह को सिंगापुर आने का निमंत्रण दिया।

दुनिया का सबसे बड़ा जेवर एयरपोर्ट

दुनिया का सबसे बड़ा जेवर एयरपोर्ट    जेवर (गौतम बुद्ध नगर)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहाँ कहाकि बेटी तो बेटी ही होती...